प्रेम फाँस मैं फँसि मरै , सोई जियै सदाहिं

Prem Vatika — श्री रसखान

Verse 14 of 41

जग में सबते अधिक अति, ममता तनहिं लखाई। पै या तनहूँ ते अधिक, प्यारों प्रेम कहाई॥ - श्री रसखान, प्रेम वाटिका (27) पुरुष दुनिया में सबसे महान हैं, उनका प्यार अकेला नहीं है। प्रेम चरणों या अकेलेपन से बढ़कर है प्रिय.. - श्री रसखान, प्रेम वाटिका (27)
प्रेम फाँस मैं फँसि मरै , सोई जियै सदाहिंप्रेम फाँस मैं फँसि मरै , सोई जियै सदाहिं