प्रेम फाँस मैं फँसि मरै , सोई जियै सदाहिं

Prem Vatika — श्री रसखान

Verse 21 of 41

कमलतंतु सो छीद अरु, कठिन खड़ग की धार। अति सूधो टेढ़ो बहुरि, प्रेमपंथ अनिवार॥ - श्री रसखान, प्रेम वाटिका (25) कठोर तलवार की धार से कमल को छेदा जाता है। अति सुधो टेढ़ाओ बहुरि, प्रेमपंथ अनिवर.. - श्री रसखान, प्रेम वाटिका (25)
प्रेम फाँस मैं फँसि मरै , सोई जियै सदाहिंप्रेम फाँस मैं फँसि मरै , सोई जियै सदाहिं