प्रेम फाँस मैं फँसि मरै , सोई जियै सदाहिं

Prem Vatika — श्री रसखान

Verse 22 of 41

कोउ याहि फाँसी कहत, कोउ कहत तरवार। नेजा भाला तीर कोउ, कहत अनोखी ढार॥ - श्री रसखान, प्रेम वाटिका (29) कुछ इसे फैंसी कहते हैं, कुछ इसे फैंसी कहते हैं। नेजा भला तीर कोऊ, कहत अनोखी धार.. - श्री रसखान, प्रेम वाटिका (29)
प्रेम फाँस मैं फँसि मरै , सोई जियै सदाहिंप्रेम फाँस मैं फँसि मरै , सोई जियै सदाहिं