प्रेम फाँस मैं फँसि मरै , सोई जियै सदाहिं
Prem Vatika — श्री रसखान
Verse 23 of 41
लोक वेद मरजाद सब, लाज काज सन्देह।
देत बहाए प्रेम करि, विधि निषेद को नेह॥
- श्री रसखान, प्रेम वाटिका (7)
संसार के सभी वेद लज्जा और सन्देह से भरे हुए हैं। प्रेम को बहने दो, प्रेम करना कानून में वर्जित है.. - श्री रसखान, प्रेम वाटिका (7)