प्रेम फाँस मैं फँसि मरै , सोई जियै सदाहिं
Prem Vatika — श्री रसखान
Verse 24 of 41
मित्र कलत्र सुबन्धु सुत, इनमें सहज सनेह।
सुद्ध प्रेम इनमें नहीं, अकथ कथा सबिसेह॥
- श्री रसखान, प्रेम वाटिका (20)
मित्र कलत्र सुबन्धु सुत, इनामेन सहज सनेह। निश्छल प्रेम का कोई पुरस्कार नहीं, अनकही कहानी ही सर्वोत्तम है.. - श्री रसखान, प्रेम वाटिका (20)