प्रेम फाँस मैं फँसि मरै , सोई जियै सदाहिं

Prem Vatika — श्री रसखान

Verse 26 of 41

पै मिठास या मार के, रोम-रोम भरपूर। मरत जियै झुकतौ थिरै, बनै सु चकनाचूर॥ - श्री रसखान, प्रेम वाटिका (30) मिठास या मौत, रोमा-रोमा भारापुर। मैं मर जाऊँगा, मैं झुक जाऊँगा, मैं बिखर जाऊँगा.. - श्री रसखान, प्रेम वाटिका (30)
प्रेम फाँस मैं फँसि मरै , सोई जियै सदाहिंप्रेम फाँस मैं फँसि मरै , सोई जियै सदाहिं