प्रेम फाँस मैं फँसि मरै , सोई जियै सदाहिं

Prem Vatika — श्री रसखान

Verse 32 of 41

प्रेम फाँस मैं फँसि मरै , सोई जियै सदाहिं। प्रेम-मरम जाने बिना, मरि कोउ जीवत नाहिं॥ - श्री रसखान, प्रेम वाटिका (26) प्रेम प्रेमी मैं फँसा मर गया, चिर सो जाऊँ। प्रेम-मराम जेन बिन, मरत न कोई.. - श्री रसखान, प्रेम वाटिका (26)
प्रेम फाँस मैं फँसि मरै , सोई जियै सदाहिंप्रेम फाँस मैं फँसि मरै , सोई जियै सदाहिं