प्रेम फाँस मैं फँसि मरै , सोई जियै सदाहिं
Prem Vatika — श्री रसखान
Verse 33 of 41
प्रेम प्रेम सब कोऊ कहत, प्रेम न जानत कोय।
जो जन जाने प्रेम तो, मरे जगत क्यों रोय॥
- श्री रसखान, प्रेम वाटिका (2)
प्यार करो, प्यार करो सब कहते हैं, लेकिन प्यार को कोई नहीं जानता। यदि लोग एक-दूसरे से प्रेम करते हैं, तो संसार क्यों रोये? - श्री रसखान, प्रेम वाटिका (2)