प्रेम फाँस मैं फँसि मरै , सोई जियै सदाहिं

Prem Vatika — श्री रसखान

Verse 38 of 41

सिर काटो छेदो हियो, टूक टूक कर देहु। पर जाके बदले विहँस, वाह वाह ही लेहु॥ - श्री रसखान, प्रेम वाटिका (32) अपना सिर काटकर मुझे चिढ़ाओ, मैं तुम्हें काट डालूँगा। लेकिन हिंसा की जगह वाह वाह हाय लेहु.. - श्री रसखान, प्रेम वाटिका (32)
प्रेम फाँस मैं फँसि मरै , सोई जियै सदाहिंप्रेम फाँस मैं फँसि मरै , सोई जियै सदाहिं