प्रेम फाँस मैं फँसि मरै , सोई जियै सदाहिं
Prem Vatika — श्री रसखान
Verse 5 of 41
बिन गुन जोबन रूप धन, बिन स्वारथ हित जानि।
सुद्ध कामना तें रहित, प्रेम सकल रसखानि॥
- श्री रसखान, प्रेम वाटिका (15)
अच्छे कर्मों के बिना धन नहीं होता, स्वार्थ के बिना ज्ञान नहीं होता। आसक्ति रहित शुद्ध चाह, प्रेम सकल रसखानि.. - श्री रसखानि, प्रेम वाटिका (15)