प्रेम फाँस मैं फँसि मरै , सोई जियै सदाहिं
Prem Vatika — श्री रसखान
Verse 6 of 41
दंपति सुख अरु विषय रस, पूजा निष्ठा ध्यान।
इन ते परे बखानियौ, शुद्ध प्रेम रसखान॥
- श्री रसखान, प्रेम वाटिका (19)
धनपति सुख और विषय, पूजा और भक्ति और ध्यान। ते पारे बखानिउ में, शुद्ध प्रेम रसखान.. - श्री रसखान, प्रेम वाटिका (19)