प्रेम फाँस मैं फँसि मरै , सोई जियै सदाहिं
Prem Vatika — श्री रसखान
Verse 7 of 41
डरै सदा चाहे न कछु, सहै सबै हो होय।
रहै एक रस चाहि कै, प्रेम बखानो सोय॥
- श्री रसखान, प्रेम वाटिका (22)
हमेशा डरो, चाहे कुछ भी हो जाए, सब कुछ सहना पड़ेगा। एक ही रस है जो मुझे चाहिए, अति प्रिय तुमको.. - श्री रसखान, प्रेम वाटिका (22)