प्रेम फाँस मैं फँसि मरै , सोई जियै सदाहिं

Prem Vatika — श्री रसखान

Verse 8 of 41

दो मन इक होते सुन्यौ, पै वह प्रेम न आहि। हौइ जबै द्वै तनहुँ इक, सोई प्रेम कहाहि॥ - श्री रसखान, प्रेम वाटिका (34) एक मन होकर सुनो, पै वह प्यार ना अहि। तुम अकेले कहाँ हो, प्यार कहाँ है? - श्री रसखान, प्रेम वाटिका (34)
प्रेम फाँस मैं फँसि मरै , सोई जियै सदाहिंप्रेम फाँस मैं फँसि मरै , सोई जियै सदाहिं