कहूँ लकुट कहुँ मुरलिका पीताम्बर सुधि नाहिं
Priti Lata — श्री ब्रजनिधि
Verse 9 of 11
प्रिया-बदन-बिधु तन लखे, पिय के नैन-चकोर।
रूप-रसासव-पान करि, छकि रहे नंदकिसोर॥
- श्री ब्रजनिधि जी, ब्रजनिधि ग्रंथावली, प्रीति लता (68)
प्रिया-बदना-बिधु का तन सुन्दर, पिया की आँखें सुन्दर। सौंदर्य का रस पी लो, चमक रहे हैं नंदकिशोर.. -श्री ब्रजनिधि जी, ब्रजनिधि ग्रंथावली, प्रीति लता (68)