कहूँ लकुट कहुँ मुरलिका पीताम्बर सुधि नाहिं
Priti Lata — श्री ब्रजनिधि
Verse 8 of 11
प्राननि तें प्यारो लगे, दंपति-सुजस-बखान।
अधिकारी बिरलो अवनि, रुचे न रस बिन प्रान॥
- श्री ब्रजनिधि जी, ब्रजनिधि ग्रंथावली, प्रीति लता (72)
प्राणानि तेन प्यारो लागे, दानपति-सुजसा-बखान। अधिकारी बिरलो अवनि, रुचे न रस बिन प्राण.. - श्री ब्रजनिधि जी, ब्रजनिधि ग्रंथावली, प्रीति लता (72)