लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि

Radha Sudha Nidhi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु

Verse 101 of 124

यन्नारदाजेश शुकैरगम्यं वृन्दावने वञ्जुल मञ्जुकुञ्जे। तत्कृण्ण- चेतो हरणैक विज्ञमत्रास्ति किञ्चित्परमं रहस्यम्॥ - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (238) यन्नारदजेश शुकैरागामिन वृंदावने वाणीजुल मंजुकुन्याजे। तत्कृन्न- चेतो हरनायक विज्ञानमात्रस्ति किंचित्परं रहस्यम्।।- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (238)
(कवित्त)लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि