प्यारी तव पद टहल कौं, कमलादिक ललचाहिँ।

Radha Sudha Nidhi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु

Verse 111 of 124

प्यारी तव पद टहल कौं, कमलादिक ललचाहिँ। शुक नारद आदिक सवै, वांछित पावत नाहिँ॥ - श्री हित किशोरी लाल, राधा सुधा निधि स्तव (85) वह कौन प्रियतम है, जो कमल के फूल की लालसा रखता है? धन्यवाद नारद आदिक सवाई, पहचान से वंचित नहीं.. - श्री हित किशोरी लाल, राधा सुधा निधि स्तव (85)
लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहिनव निकुञ्ज वर नागरी, अहो प्रिये रस दान।