नव निकुञ्ज वर नागरी, अहो प्रिये रस दान।

Radha Sudha Nidhi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु

Verse 112 of 124

नव निकुञ्ज वर नागरी, अहो प्रिये रस दान। सोइ टहल मुहि कृपा कर, देहु आपुनी जान॥ - श्री हित किशोरी लाल, राधा सुधा निधि स्तव (85.3) नव निकुंज वर नागरी, हे प्रिय रस दान। सोई टहल मुहि कृपा, देहु आपुनि जन.. - श्री हित किशोरी लाल, राधा सुधा निधि स्तव (85.3)
प्यारी तव पद टहल कौं, कमलादिक ललचाहिँ।याही रस-मय नाम सौं, राखत प्रेम अपार।