याही रस-मय नाम सौं, राखत प्रेम अपार।

Radha Sudha Nidhi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु

Verse 113 of 124

याही रस-मय नाम सौं, राखत प्रेम अपार। लगत तुच्छ पुरुषार्थ सब, यह आगैं सुकुमार॥ - श्री हित किशोरी लाल, राधा सुधा निधि स्तव (94.2) याहि रस-मय नाम सौं, राखत प्रेम अपार। सारे प्रयास तुच्छ या निर्दोष लगते हैं.. - श्री हित किशोरी लाल, राधा सुधा निधि स्तव (94.2)
नव निकुञ्ज वर नागरी, अहो प्रिये रस दान।लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि