लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
Radha Sudha Nidhi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु
Verse 121 of 124
तस्या अपार रस सार विलास मुर्ते: आनन्द कन्द पर्माद्भूत सौम्य लक्ष्म्याः।
ब्रह्मादिदुर्गम गतेर्वृषभानुजाया कैंकर्यएंव मम जन्मनि जन्मनि स्यात॥
- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (39)
तस्य अपार रस सर विलास मूरते: आनंद कंद परमद्भूत सौम्य लक्ष्म्य। ब्रह्मादिदुर्गं गतेर्वृषभानुजय कैंकर्येणव मम जन्मनि जन्मनि स्यात्।।- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (39)