लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
Radha Sudha Nidhi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु
Verse 15 of 124
श्रीराधिके सुरतरङ्गि नितम्ब भागे काञ्चीकलाप कल हंस कलानुलापैः।
मञ्जीरसिञ्जित मधुव्रत गुञ्जिताङ्घ्रिःपङ्गेरुहै: शिशिरयस्व रसच्छटाभिः॥
- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (19)
श्रीराधिका के सुन्दर नितम्ब हंस कलानुलपाइह कल कन्याकल्प से भाग गये। मंजिरासिन्यजित मधुव्रत गुंजितांगगृहपंगृहैः शिशिरयस्व रसचतभिः।।- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (19)