त्वत्सेवा रीतिराश्चर्य लोकवेद-विलक्षणा।

Radha Sudha Nidhi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु

Verse 19 of 124

त्वत्सेवा रीतिराश्चर्य लोकवेद-विलक्षणा। तवैव कृपया लभ्या कदा सद्गुरु सङ्गतः॥ - श्री हित कृष्ण चंद्र, श्री राधा उपसुधा निधि (24) तत्सेव रीतिराश्चरि लोकवेदविलक्षणः। तवैव कृपाय लाभ्य कड़ा सदगुरु संगत.. - श्री हित कृष्ण चंद्र, श्री राधा उपसुधा निधि (24)
लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि(कवित्त)