लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि

Radha Sudha Nidhi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु

Verse 18 of 124

गत्वा कलिन्दतनयाविजनावतार मुद्वर्तयन्त्यमृत मंगमनंगजीवम्। श्रीराधिके तव कदा नवनागरेन्द्रं पश्यामि मग्न नयनं स्थित मुच्चनीपे॥ - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (23) गत्वा कलिंदतनयविज्ञानावतार मुद्वर्तयन्त्यमृत मंगमन्नगजीवम्। श्री राधिके तव कदा नवनगरेन्द्रं पश्यामि मगन नयनन स्थित मुच्चनिपे.. - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (23)
लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहित्वत्सेवा रीतिराश्चर्य लोकवेद-विलक्षणा।