लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
Radha Sudha Nidhi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु
Verse 2 of 124
दिव्यप्रमोदरससारनिजांगसंग पीयूषविचिनिचयैरभिषेचयन्ति।
कन्दर्प कोटि शरमूर्च्छित नन्दसूनुर्संजीवनी जयति कापि निकुंजदेवी॥
- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (5)
दिव्य प्रमोदरासासारनिजंगसंग पीयूषविचिनिचयैरभिषेचयन्ति। कंदर्प कोटि शरमुच्छित नंदसुनुरसंजीवनी जयति कपि निकुंजदेवी.. - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (5)