कोटि-कोटि जगद्भासि नखचन्द्र मणिच्छटे।
Radha Sudha Nidhi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु
Verse 3 of 124
कोटि-कोटि जगद्भासि नखचन्द्र मणिच्छटे।
आश्चर्य्य रूप-लावण्ये सकृन्मे देहि दर्शनम्॥
- श्री हित कृष्ण चंद्र, श्री राधा उपसुधा निधि (5)
कोटि जगद्भासि नखचन्द्र मणिच्छते। अश्चर्य रूप-लावण्ये सक्रिम्मे देहि दर्शनम्.. - श्री हित कृष्ण चन्द्र, श्री राधा उपसुधा निधि (5)