लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि

Radha Sudha Nidhi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु

Verse 21 of 124

लावण्यसाररस सारसुखैकसारे कारुण्यसार मधुरच्छविरूपसारे। वैदग्ध्यसार रतिकेलिविलाससारे राधाभिधे मम मनोखिलसारसारे॥ - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (25) लावण्यसारस सरसुखैकासरे करुण्यसार मधुरचविरूपसरे। वैदाग्ध्यासर रतिकेलिविलासरे राधाभिधे मम मनोखिलसरारे.. - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (25)
(कवित्त)रस औ लुनाई की सार है नवेली बाल,