रस औ लुनाई की सार है नवेली बाल,
Radha Sudha Nidhi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु
Verse 22 of 124
रस औ लुनाई की सार है नवेली बाल,
सुख की है सार करुना हू की सार है। [1]
शोभा छवि रूप माधुरी की है सार बाल,
परम प्रवीन अति चातुरी की सार है॥ [2]
नागर के संग रस रंग की विलास सार,
केलि कौ प्रकास हाव भाव गति सार है। [3]
ताही के चरन माहिं मेरो मन बसौ नित्त,
राधा जाको नाम सब सारन की सार है॥ [4]
- श्री हित किशोरी लाल, राधा सुधा निधि स्तव (25)
खुशी और खुशी का सार नए बालों का सार है, खुशी का सार करुणा का सार है। [1] माधुरी का सौंदर्य, छवि और रूप शक्ति का मुखिया है, परम कौशल और चतुराई का मुखिया है.. [2] नगर का मुखिया स्वाद और रंग का वैभव है, प्रकाश, भावना और गति का मुखिया है। [3] हर दिन मेरा मन उनके चरणों में रहता है, मैं जाकर स्वयं को राधा के नाम पर सबको समर्पित कर देता हूं। [4] - श्री हित किशोरी लाल, राधा सुधा निधि स्तव (25)