राधेजू मेरौ जनम सुधारौ।

Radha Sudha Nidhi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु

Verse 29 of 124

राधेजू मेरौ जनम सुधारौ। अब मोंहि वृन्दावन में डारौ॥ - श्री गोविन्दशरण देवाचार्य राधेजू मेरा जन्म सुधारो। अब वृन्दावन में साधुओं को डर लगता है.. - श्री गोविंदशरण देवाचार्य
भूत्वाति सुकुमाराङ्गी किशोरी गोप कन्यका।लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि, दूरहि सों दुरियायौ।