लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि, दूरहि सों दुरियायौ।
Radha Sudha Nidhi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु
Verse 30 of 124
लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि, दूरहि सों दुरियायौ।
जप वृतादि साधनन युगन सौं, ह्वै निराश बिसरायौ॥ [1]
अद्भुत आनंद-धार सहज ही, श्रवत पुराननि गायौ ।
सो राधा पग ललित रैन सौं, मन मैं लाय लगायौ॥ [2]
- श्री हित किशोरी लाल, राधा सुधा निधि स्तव (32)
प्रजा, कुटुम सुख यानि अनंति, दुर्हि पुत्र दूरियौ। जप वृत्तादि साधनं युगं सौं, वै निरश दिसारौ। [1] अद्भुत आनंद-धर सहज, स्रवत पुराणनि गाइउ। सो राधा पग ललित रैन सौं, मन मैं लै लगायौ.. [2] - श्री हित किशोरी लाल, राधा सुधा निधि स्तव (32)