लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
Radha Sudha Nidhi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु
Verse 4 of 124
तन्नः प्रतिक्षण चमत्कृत चारूलीला लावण्य मोहन महामधुराङ्गभङ्गि।
राधाननं हि मधुराङ्ग कलानिधानमाविर्भविष्यति कदा रससिन्धु सारम्॥
- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (6)
तन्नः प्रतिपाला चमत्कारी चारुलिला लावण्य मोहन महामधुरंगभंगगी। राधान्नं हि मधुरांग कलानिधानं विरभविष्यति कदा रससिंधु शरणम्। - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (6)