सर्वथा सार सारैक नखचन्द्र-सुधालवे।

Radha Sudha Nidhi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु

Verse 47 of 124

सर्वथा सार सारैक नखचन्द्र-सुधालवे। कथं त्वच्चरणाम्भोज सेवाशां त्युक्त मुत्सहे॥ - श्री हित कृष्ण चंद्र, श्री राधा उपसुधा निधि (61) बिल्कुल सर सारिक नखचंद्र-सुधलावे। कथं त्वचरणम्भोज सेवासं त्यात् मुत्शे.. - श्री हित कृष्ण चन्द्र, श्री राधा उपसुधा निधि (61)
लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहिअनाथं पतितं मूढं त्वदेक-पद जीवनम्।