अनाथं पतितं मूढं त्वदेक-पद जीवनम्।

Radha Sudha Nidhi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु

Verse 48 of 124

अनाथं पतितं मूढं त्वदेक-पद जीवनम्। कृपा स्निग्धाबलोकेन पश्य वृन्दावनेश्वरी॥ - श्री हित कृष्ण चंद्र, श्री राधा उपसुधा निधि (63) अनाथं पतितं मुधं त्वदेक-पाद जीवनम्। कृपा स्निग्धबलकैं पश्य वृन्दावनेश्वरी.. - श्री हित कृष्ण चन्द्र, श्री राधा उपसुधा निधि (63)
सर्वथा सार सारैक नखचन्द्र-सुधालवे। राधे त्वद्दास्य पदवी सर्व भक्तश्च दुर्गमा।