लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि

Radha Sudha Nidhi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु

Verse 54 of 124

प्रेम्णः सन्मधुरोज्ज्वलस्य हृदयं श्रृंगारलीलाकला वैचित्री परमावधिर्भगवतः पूज्यैव कापीशता। ईशानी च शची महासुख तनुः शक्तिः स्वतन्त्रा परा श्रीवृन्दावन नाथ पट्टमहिषी राधैव सेव्या मम॥ - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (78) प्रेमः सम्मधूरोज्वल्स्य हृदयं श्रृंगारलीलकला वैचित्रा परमवधिरभगवत पूज्यैव कपिष्ट। ईशानि च शची महासुख तनुः शक्तिः पर श्री वृन्दावन नाथ पट्टमहिषी राधाव सेव्य मम।।- श्री हित हरिवंश महाप्रभ, श्री राधा सुधा निधि (78)
(छप्पय)लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि