(कवित्त)
Radha Sudha Nidhi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु
Verse 73 of 124
(कवित्त)
राधिका के नाम हीसौं काम हमें रैन-दिन,
छाँड़ि श्रुति साधन करोड़न जे गाये हैं। [1]
प्यारी पद-पंकज पै बार-बार डारौं बलि,
कोटि पुरुषार्थ न मेरे मन भाये हैं॥ [2]
तिनहीं के चरण सरोजन की लीला वर,
अगिनित कल्पतरु देखि सकुचाये हैं। [3]
जाकी निज दासिनि के पायन में रिद्धि सिद्धि,
लोटत असंख्य औ अनंत शिर नाये हैं॥ [4]
- श्री हित किशोरी लाल, राधा सुधा निधि स्तव (143)
(कविता) हमारा नाम राधिका, रैना-दीन, चंडी श्रुति यानि लाखों लोग गए। [1] प्रिय पद - पंकज पै दारौं बालि बारंबार, सब यत्न से मैं डरता हूं। [2] सरोजन की लीला वर, तीन चरणों में असंख्य कल्पत्र, मैं नहीं देख सका। [3] मेरी दासिनी, ऋद्धि सिद्धि के चरणों में, असंख्य गोद और नौ शीश हैं.. [4] - श्री हित किशोरी लाल, राधा सुधा निधि स्तव (143)