लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
Radha Sudha Nidhi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु
Verse 79 of 124
लुलित नव लवङ्गोदार कर्पूरपूरं-
प्रियतम-मुख-चन्द्रोदगीर्ण ताम्बूल-खण्डम्।
घनपुलक कपोला स्वादयन्ती मदास्ये-
र्पयतु किमपि दासी-वत्सला कर्हि राधा॥
- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (155)
लुलित नव लवंगगोदर कर्पूरपूर्ण-प्रियतम-मुख-चन्द्रोदगिर्ण तंबुला-खंडम। घनपुलक कपोल स्वदयन्ति मदस्ये- रापयतु किमापि दासी-वत्सला करहि राधा.. - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (155)