लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि

Radha Sudha Nidhi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु

Verse 86 of 124

श्रीगोपेन्द्र-कुमार-मोहन-महाविद्ये स्फुरन्माधुरि, सारस्फार रसाम्बुराशि सहज प्रस्यन्दि-नेत्राञ्चले। कारुण्यार्द्र कटाक्ष- भङ्गि मधुरस्मेराननांभोरुहे, हा हा स्वामिनि राधिके मयिकृपा-दृष्टिं मनाङ् निक्षिप॥ - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (188) श्री गोपेन्द्र-कुमार-मोहन-महाविद्ये पूर्णमाधुरी, सरसफ़र रसम्बुराशि सहज प्रश्यन्ति-नेत्रान्यचले। करुण्याद्र व्यंग्य-भंगगी मधुरस्मेराननानभोरुहे, हा हा स्वामी राधिके मयिकृपा-दृष्टि मनंग निक्षि.. - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (188)
लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहिलोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि