लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि
Radha Sudha Nidhi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु
Verse 85 of 124
ययोन्मीलत्केली विलसित कटाक्षैक कलया, कृतो वन्दी वृंदाविपिन कलभेंद्रो मदकल:।
जडीभूत: क्रीडामृग-इव यदाज्ञा-लव कृते, कृती न: सा राधा शिथिलयतु साधारण-गतिम्॥
- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (187)
ययोनमिलात्केलि विलासित कात्शिक कालया, कृतो वंदि वृंदाविपिं कलाभेन्द्रो मदाकाल। जड़भूत: क्रीदामृग-इव यद्ग्य-प्रेम कृते, कृति न: स राधा स्थिरयतु साधरण-गतिम्। - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (187)