लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि

Radha Sudha Nidhi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु

Verse 94 of 124

अहो तेमी कुञ्जास्तदनुपम रासस्थलमिदं, गिरिद्रोणी सैव स्फुरति रति-रंङ्गे-प्रणयिनी। न वीक्षे श्रीराधां हर-हर कुतोपीति शतधाविदीर्येन्त प्राणेश्वरि मम कदा हन्त हृदयम्॥ - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (209) ओह तेमि कुन्याजस्तदनुपं रसस्थलमिदम, गिरिद्रोणि शैव स्फुरति रति-रंगगे-प्राणयनी। न विक्षे श्रीराधां हर-हर कुटोपिति शतधाविद्र्यन्त प्राणेश्वरी मम कद हन्त हृदयम्। - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (209)
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