राधिके काहे करो हठ री

Radha Sudha Shataka — श्री हठी जी

Verse 11 of 51

(कवित्त) गाय उठीं किंनरी नरीन ये सुरन सबै, द्वार द्वार नगर नगारा धुनि छाई है। [1] सुर हरखाने दरसाने बरसाने प्रेम, सरसाने फूल बरखा लै बरसाई है॥ [2] बन्दीजन बिरद बखानैं भांति भांति हठी, लीन्हो अवतार राधे वेदन हूँ गाई है। [3] धन्य ब्रजमण्डल सु धन्य कूख कीरति की, धन्य वृषभान जू के भाग की भलाई है॥ [4] - श्री हठी जी, राधा सुधा शतक (39) (कविता) गे उठिन किन्नरी नारिन ये सुरन सबै, द्वार द्वार नगर नगारा धुनि छाई है। [1]. [3] धन्य ब्रजमंडल सु धन्य कुख कीर्ति की, धन्य वृषभान जू के भाग का कल्याण। [4] - श्री हाथी जी, राधा सुधा शतक (39)
राधिके काहे करो हठ रीराधिके काहे करो हठ री