राधिके काहे करो हठ री

Radha Sudha Shataka — श्री हठी जी

Verse 12 of 51

(कवित्त) गति पै गयन्द वारौं पग अरविन्द वारौं, हठी अलि वृन्दवारौं अलकन फंद पै। [1] गुल्फ पे गुलिन्द वारौं शीलता पै सिन्धु वारौं, सकल सुगन्ध वारौं मुखकी सुगन्ध पै॥ [2] कटि पै मृगेन्द्र वारौं तन छवि वृन्द वारौं, बेनी पै कनींद्र वारों जात नदनंद पै। [3] ओठ जीव बन्धु वारौं हाँसी सुधा कन्द वारौं, कोटि-कोटि चन्द्र वारौं श्री राधा मुख चन्द पै॥ [4] - श्री हठी जी, राधा सुधा शतक (98) (कविता) गति पै गयंद वरौं पग अरविंद वरौं, हाथी अली वृंदावरौं अलकन फंद पै। [1] खाड़ी पर गुलिंद के फूल हैं, सिंधु के फूल हैं, सकल पर मुख की सुगंध है.. [2] कमर पर मृगेंद्र फूल हैं, शरीर पर छवि है, शिखर पर कनींद्र फूल हैं, कमर पर नदानंद हैं। [3] ओथ जीव बंधु वरौं हंसी सुधा कंद वरौं, कोटि-कोटि चंद्र वरौं श्री राधा मुख चंद पै.. [4] - श्री हाथी जी, राधा सुधा शतक (98)
राधिके काहे करो हठ रीराधिके काहे करो हठ री