राधिके काहे करो हठ री

Radha Sudha Shataka — श्री हठी जी

Verse 13 of 51

गुरुपद हिय में धारि कै, सुमृत वेद परमान। हठी कछू बरनन करत, राधा रूप निधान॥ - श्री हठी जी, श्री राधा सुधा शतक (9) गुरुपद ही पुरुष है, सुमृत वेद सर्वोपरि है। हाथी कछुए की सीप में भरता है, उसे राधा के रूप में रखता है.. - श्री हाथी जी, श्री राधा सुधा शतक (9)
राधिके काहे करो हठ रीराधिके काहे करो हठ री