राधिके काहे करो हठ री

Radha Sudha Shataka — श्री हठी जी

Verse 15 of 51

(सवैया) जाकी कृपा शुक ग्यानी भये, अति दानी जो ध्यानी भये त्रिपुरारी। [1] जाकी कृपा विधि वेद रचै, भये व्यास पुरानन के अधिकारी॥ [2] जाकी कृपा ते त्रिलोक धनी, सुकहावत श्री ब्रज चंद बिहारी। [3] लोक-घटा ते 'हठी' को बचाओ, कृपा करि श्री वृषभानु दुलारी॥ [4] - श्री हठी जी, राधा सुधा शतक (84) (सवैया) जाकी कृपा शुक ज्ञानी भये, अति दानी जो ध्यानी भये त्रिपुरारि। [1] भये व्यास पुराण के प्रमाण के अनुसार इन्हीं की कृपा से वेदों की रचना हुई.. [2] इन्हीं की कृपा से तीनों लोकों के धनी श्री ब्रज चंद बिहारी जी धन्य हैं। [3] लोकघाट से 'हाथी' को बचाएं, श्री वृषभानु दुलारी.. [4] - श्री हाथी जी, राधा सुधा शतक (84)
राधिके काहे करो हठ रीराधिके काहे करो हठ री