राधिके काहे करो हठ री

Radha Sudha Shataka — श्री हठी जी

Verse 16 of 51

जाकौं नेति नेति कहि वेदन बखानै भेद, नारद न जाने नहीं काहू ठीक पारो है। [1] संभु सुर सुरपति सुक मुनि आदि दै कै, करि जोग जग्य जप तप तन गारो है॥ [2] हठी की आधार वृषभान की कुमारि ऐसी, तीन लोक जाकी कृपा कोर को पसारो है। [3] चार मुख वारो विधि कहै का बिचारो, दससतमुख वारी राधा गुन कहि हारो है॥ [4] - श्री हठी जी, राधा सुधा शतक (56) नारद को नहीं पता कि पारो सही बात क्यों कह रही है। [1] सनाभु सुर सुरपति सुक मुनि आदि दै कै, करि जोग जग्या जप तप तन गारो है। [2] हाथी के आधे भाग वृषभ की पुत्री ऐसी है कि वह तीनों लोकों का कल्याण करती है। [3] चतुर्मुखी योद्धाओं की विधि कहां है, आप सोचते हैं, दसमुखी योद्धाओं की राधा के गुण कहां हैं? [4] - श्री हाथी जी, राधा सुधा शताब्दी (56)
राधिके काहे करो हठ रीराधिके काहे करो हठ री