राधिके काहे करो हठ री

Radha Sudha Shataka — श्री हठी जी

Verse 18 of 51

(कवित्त) कल्पलता के किधो पल्लव ये नवीन दोऊ, हरण मञ्जुता के कंजता के वनिता के है। [1] पावन पतित गुँण गावें मुनि ताके छबि, छलै सविता के जनता के गुरुता के है॥ [2] नऊ निधिता के सिधिता के आदि आलै हठी, तीनों लोक ताके प्रभुता के प्रभु ताके हैं। [3] कटैं पाप ताके बढ़ै पुण्य के पताके जिन, ऐसे पद ताके वृषभानु की सुता के हैं॥ [4] - श्री हठी जी, राधा सुधा शतक (2) (कविता) यह नया जोड़ा कल्पलता के किधो पल्लव, हरण से मंजुता की नजता की वनिता का है। [1] पवन पतित गुण दे दे मुनि ताके छवि, सविता के गुरुताके के चलाय के जन.. [2] आदि अलै हाथी नौ निधिता की सिद्धिता, तीनों लोक के स्वामी ताके गुरुताके। [3] इतने पाप हैं, बधाइयां फूट रही हैं, ऐसे हैं वृषभानु के भजन के पद.. [4] - श्री हाथी जी, राधा सुधा शतक (2)
राधिके काहे करो हठ रीराधिके काहे करो हठ री