राधिके काहे करो हठ री

Radha Sudha Shataka — श्री हठी जी

Verse 21 of 51

कोऊ धन धाम, चाहे अबिराम कोऊ, साहिबी सुरेस भाँति लाख लहियतु है। [1] कोऊ गजराज, महाराज, सुखराज कोऊ, तीरथ बरत नेम अंग दहियतु है॥ [2] ऐसो चित चाहे, चरचा है दुनिया की हठी, चाहै हृदै एक तौन ठीक ठहियतु है। [3] जन रखवारी की सु प्रभु प्रानप्यारी की, सुकीरति-दुलारी की नज़र चहियतु है॥ [4] - श्री हठी जी, राधा सुधा शतक (7) धन धाम जो भी हो, अबिराम कुओ हो, साहिबी सुरा हो, लाखों लहियातु हैं। [1] कुओ गजराज, महाराज, सुखराज कुओ, तीरथ बारात नाम अंग दहियातु है.. [2] ऐसा मन है, चर्चा संसार का हाथी है, हृदय वही है। [3] लोगों की रक्षा के लिए भगवान प्राणप्यारी, सुकीर्ति-दुलारी का ध्यान आवश्यक है.. [4] - श्री हाथी जी, राधा सुधा शतक (7)
राधिके काहे करो हठ रीराधिके काहे करो हठ री