राधिके काहे करो हठ री

Radha Sudha Shataka — श्री हठी जी

Verse 22 of 51

(कवित्त) कोऊ उमाराज रमाराज जमाराज कोऊ, कोऊ रामचन्द्र सुख कंद नाम नाधे में। [1] कोऊ ध्यावै गजपति फनपति सुरपति कोऊ, देव ध्याय फल लेत पल आधे में॥ [2] ‘हठी’ को आधार निराधार कौ आधार तू ही, जप तप जोग जग्य कछवै न साधे में। [3] कटैं कोटि बाधे मुनि धरत समाधि ऐसे, राधे पद रावेरे सदा अवराधे में॥ [4] - श्री हठी जी, राधा सुधा शतक (5) (कविता) कुओ उमाराज रामराज जमराज कुओ, कुओ रामचन्द्र सुख कंद नाम नाधे पुरुष। [1] कुओ ध्यावै गजपति फणपति सुरपति कुओ, देव धाय फल लेत पाल अध पुरुष। [2] 'हाथी' लाचार है, तुम लाचार हो, तुम लाचार हो, जप तप जोग जग्या कछवै न साधे पुरुष। [3] इस प्रकार लाखों ऋषियों ने पृथ्वी समाधि प्राप्त कर ली है, वे सदैव राधे के चरणों की वन्दना करते हैं। [4] - श्री हाथी जी, राधा सुधा शतक (5)
राधिके काहे करो हठ रीराधिके काहे करो हठ री