राधिके काहे करो हठ री
Radha Sudha Shataka — श्री हठी जी
Verse 23 of 51
(सवैया)
माखन तें मखतूलहू तें, सुकुमार सिरोमन कञ्ज कली के। [1]
लाल गुलाल प्रवाल के भूषन, दूषन हैं घनश्याम छली के॥ [2]
आली गुलाब को आबहि वारिये, चारिये ये ब्रजकुञ्ज थली के। [3]
भानु प्रताप कौ निंदित है, पद बंदत हौं वृषभानलली के॥ [4]
- श्री हठी जी, राधा सुधा शतक (79)
(सवैया) माखन तेन मखतुलहु तेन, सुकुमार सिरोमन कन्याज काली की। [1] लाल गुलाल, मूंगा आभूषण, घनश्याम चली.. [2] चलो अब गुलाब खिलाएं, ब्रजकुंज थाली खिलाएं। [3] भानु प्रताप की आलोचना कौन कर रहा है, मैं वृषभानलाली से बंधा हूं.. [4] - श्री हाथी जी, राधा सुधा शतक (79)