राधिके काहे करो हठ री
Radha Sudha Shataka — श्री हठी जी
Verse 24 of 51
(कवित्त)
मखमल माखन से इन्दु की मयूखन से,
नूतन तमालपत्र आभा आभरन हैं। [1]
गुल से गुलाल से गुलाब जपा जावक से,
पावक प्रवाल लाल गावै भू धरन हैं॥ [2]
उमापति रमापति जमापति आठों याम,
ध्यावत रहत चारि फल के करन हैं। [3]
पंकज बरनि छबि छबिके हरन हठी,
सुख के करन राधे रावरे चरन हैं॥ [4]
- श्री हठी जी, राधा सुधा शतक (4)
(कविता) इंदु के दूध के मखमली मक्खन से, नव तमालपत्र की आभा प्रकाश से भर जाती है। [1] बाहर गुलाल से गुलाल जपते, धर्मात्मा प्रवल लाल गायक भूमिधारी हैं.. [2] उमापति रमापति जमापति आठों यम ध्यावत रहत चारी फल। [3] पंकज बरनी छवि हरण हाथी द्वारा प्रकाशित, राधे के चरण सुख के कारण हैं.. [4] - श्री हाथी जी, राधा सुधा शतक (4)