राधिके काहे करो हठ री

Radha Sudha Shataka — श्री हठी जी

Verse 26 of 51

(सवैया) नवनीत गुलाब से कोमल हैं, 'हठी' कंज की मंजुलता इनमें। [1] गुललाला गुलाब प्रबाल जपा, छबि ऐसी न देखी ललाईन में॥ [2] मुनि मानस मंदिर मध्य बसै, बस होत है सूधै सूभाईन में। [3] रहुरे मन तू चित चाइन सों, वृषभानु किशोरी के पायन में॥ [4] - श्री हठी जी, राधा सुधा शतक (49) (सवैया) नवनीत गुलाब से भी कोमल है, 'हाथी' कोहनियों की सुहावनाता लौटा देता है। [1] जोर से जपें गुलालाला, छवि ऐसी न दिखे। [2] मुनि मानस मंदिर बीच में स्थित है, वह एक अच्छे और अच्छे इंसान हैं। [3] राहुरे मन तू चित चैन पुत्र, वृषभानु किशोरी के पयन पुरुष.. [4] - श्री हाथी जी, राधा सुधा शतक (49)
राधिके काहे करो हठ रीराधिके काहे करो हठ री