राधिके काहे करो हठ री

Radha Sudha Shataka — श्री हठी जी

Verse 32 of 51

(कवित्त) रमा को कहा है रति रम्भा को कहा है ए, बखानै बिधि चारौ मुख चारौ देव नौ गुनौ। [1] सची को कहाहै सत्यभामा कौ कहाहै अरु, चन्द कौ कहा है जामे राजत है औगुनौ॥ [2] चंगा कौ कहा है चामीकर कौ कहा है चारु, करके विचार निराधार हठी जो गुनो। [3] राधे महारानी जू कौ रूप सब रुपनते, दुगुनौ है तिगुनौ है चौगुनौ है सौगुनौ॥ [4] - श्री हठी जी, राधा सुधा शतक (95) (कविता) राम को रति कहा जाता है, रम्भा को ए कहा जाता है, बखनै बिधि चारौ मुख चारौ देव नौ गुणौ। [1] सत्यभामा किसे कहते हैं, अरु किसे कहते हैं, चंद किसे कहते हैं, जामे रजत औगुणौ किसे कहते हैं.. [2] चमत्कार किसे कहते हैं, चारु किसे कहते हैं, निराधार हठ किसे कहते हैं? [3] राधे महारानी, ​​जिनका रूप पूर्णतः परिवर्तित है, दोगुना, तिगुना, चौगुना, सौ.. [4] - श्री हाथी जी, राधा सुधा शतक (95)
राधिके काहे करो हठ रीराधिके काहे करो हठ री